श्मशान घाट हादसे के तीन साल बाद भी पीड़ित परिवारों को नहीं मिला न्याय

मुरादनगर ( दीपक सैन ), मुरादनगर श्मशान घाट हादसे को पूरे तीन साल हो जाने के बाद भी मृतकों के पीड़ित परिवारों को अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है। आश्वासन के बाद भी अभी तक पीड़ित परिवार को न तो आवास मिला है और न ही परिवार के किसी सदस्य को नौकरी। जबकि जिला प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवारों को मुआवजे के साथ-साथ आवास, सरकारी नौकरी व बच्चों की निशुल्क पढ़ाई का आश्वासन दिया था।
बता दें कि 3 जनवरी 2021 को मुरादनगर के बंबा रोड स्थित श्मशान घाट में एक बुर्जुग व्यक्ति के क्रियाक्रम के दौरान गैलरी की छत गिर गई थी। इस हादसे में क्रियाक्रम में आए 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए थे। हादसे के पीछे नगरपालिका परिषद मुरादनगर व ठेकेदार की लापरवाही सामने आने पर मृतक लोगों के परिजनों व क्षेत्र की जनता में रोष व्याप्त हो गया था। जिसके चलते 4 जनवरी 2021 को परिजनों ने शवों को दिल्ली-मेरठ मार्ग पर रखकर जाम लगाया था। इस दौरान जिला प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, आवास व बच्चों की शिक्षा निशुल्क दिलाने का आश्वासन दिया था। पीड़ितों को मुआवजा तो मिला गया, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी अभी तक सरकारी नौकरी व आवास नहीं मिला है। हादसे के पीड़ित मंजू, पिकी, बबीता, रजनी, ममता, नीलम, कविता व पुष्पलता ने बताया कि अब तो शासन प्रशासन का कोई भी अधिकारी हाल पूछने भी नहीं आता है। उन्होंने बताया कि आमदनी न होने के कारण कई परिवार तो भूखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि यह भी पता नहीं चल रहा है कि एसआईटी की जांच में किसे रखा गया है और किसी निकाला गया है। हादसे के दोषियों को सजा मिलेंगी या नहीं, इसका भी कोई पता नहीं है।
आंदोलन चलाने के बाद भी नहीं मिली कामयाबी:
पीड़ित परिवारों ने दो साल पहले सरकारी नौकरी व आवास दिलाने की मांग को लेकर नगर पालिका परिषद कार्यालय परिसर में कई दिनों तक धरना दिया था। आश्वासन देकर पीड़ितों का धरना समाप्त करा दिया गया। पीड़ित परिवारों का कहना है कि अब तो हम लोगों ने कुछ भी मिलने की उम्मीद छोड दी है। उनका कहना है कि लोकसभा के चुनाव आ रहे हैं और फिर जनप्रतिनिधि झूठे वादें करके चले जाएगे।
इनके खिलाफ दर्ज हुई थी रिपोर्ट:
श्मशान घाट हादसे के मामले में नगर पालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी निहारिका चौहान, पूर्व जेई चंद्रपाल सिंह, सुपरवाइजर आशीष व ठेकेदार अजय त्यागी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। जेई, ठेकेदार व सुपरवाइजर समेत चार आरोपियों पर रासुका लगाई थी। जबकि जांच में संजय गर्ग, सचिन गर्ग, विपिन गर्ग, भानू प्रकाश व गिरिश त्यागी के नाम बाद में सामने आये थे। बताया जा रहा है कि सभी आरोपी जमानत पर बाहर चल रहे है।
अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौन:
श्मशान घाट हादसे के मामले के बारे में कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। इसके अलावा राजनीति दलों के नेता भी इस बारे में कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है।

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